रहस्यमय नोट्स और एक अजनबी

रहस्यमय कैफे की तस्वीर

हर सुबह, जब सूरज की पहली किरणें "मॉर्निंग ड्यू कैफे" की खिड़कियों से छनकर अंदर आतीं, तो वहाँ एक अजीब चीज़ होती—एक नोट। कोई नहीं जानता था कि ये नोट्स कौन छोड़ जाता है। बस, एक सफेद लिफाफा, काउंटर पर रखा हुआ, जिस पर हमेशा एक ही नाम लिखा होता—आर्या

"जब घड़ी की सुई 12 बजाए, तो तीसरी पंक्ति में देखो।"

आर्या ने सोचा, शायद कोई मज़ाक है। लेकिन अगले दिन फिर एक नोट आया। इस बार लिखा था:

"वो किताब जिसे तुम हर रोज़ पढ़ती हो, उसके पेज 47 पर जाओ।"
पुरानी किताब और कॉफी

आर्या की रूह काँप उठी। वह किताब जो वह हर दिन पढ़ रही थी, उसके पेज 47 पर एक पुरानी तस्वीर थी—एक खंडहर हो चुका घर, जिसके बारे में उसे कुछ भी नहीं पता था।

कैफे के मालिक, राजन, ने कहा कि उसे कुछ पता नहीं। कैमरे में कुछ दिखाई नहीं देता। हर सुबह, जब दुकान खुलती, नोट वहाँ पड़ा होता। कोई नहीं जानता कि कौन लाता है इसे।

एक दिन, नोट में लिखा था:

"तुम्हारे पिता ने जो छुपाया था, वो तुम्हारे हाथ लगने वाला है।"

आर्या के पिता पांच साल पहले गायब हो गए थे। क्या इन नोट्स का उनसे कोई संबंध था? उसने फैसला किया कि वह इस रहस्य का पता लगाएगी।

रहस्यमय चाबी
~ एक रहस्यमय कथा

कहानी जारी रहेगी... अगले भाग में जानिए क्या छुपा था उस चाबी में!

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