चाबी का रहस्य

पुरानी चाबी

आर्या ने काँपते हाथों से वह पुरानी चाबी उठाई जो किताब से गिरी थी। चाबी पर एक नंबर खुदा था - 317। उसकी साँसें तेज हो गईं। यह वही नंबर था जो पिछले हफ्ते के नोट में लिखा था: "317 सच का दरवाज़ा खोलेगा"

"आज रात 12 बजे, पुराने डाकघर के पीछे आओ। अकेले आना।"

आर्या ने अपने फोन में राजन का नंबर डायल किया, पर फिर रुक गई। अगर यह उसके पिता से जुड़ा था, तो उसे खुद ही जाना होगा। शाम होते ही वह नोट में बताई जगह पर पहुँच गई।

पुराना डाकघर

डाकघर के पीछे एक पुराना तहखाना था। चाबी नंबर 317 से तहखाने का ताला खुल गया। अंदर एक धूल भरा बक्सा पड़ा था, जिस पर आर्या के पिता का नाम लिखा था।

बक्से में थे:

  • पिता की पुरानी डायरी
  • एक तस्वीर जहाँ आर्या छोटी थी
  • एक अखबार की कतरन: "वैज्ञानिक गायब, शोध गुप्त"

डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था:

"अगर तुम यह पढ़ रही हो आर्या, तो समझ जाओ मैंने जो खोजा था, वह खतरनाक है। कैफे के नोट्स तुम्हें सच तक ले जाएँगे, पर सावधान रहना। वे तुम्हें देख रहे हैं।"

तभी आर्या को पीछे से कदमों की आवाज़ सुनाई दी। कोई था जो उसका पीछा कर रहा था...

कहानी जारी रहेगी... अगले भाग में जानिए कौन कर रहा था आर्या का पीछा!

Comments

Popular posts from this blog

5-in-1 Multi-Styling Hair Tool - A Rock's Mart Exclusive