अतीत की छाया - भाग 2 (अंतिम कड़ी)
हत्यारे की पहचान
नीता मेहरा की डायरी में विक्रम का नाम पढ़ते ही अर्जुन मल्होत्रा की धड़कनें तेज़ हो गईं। क्या विक्रम ही वो हत्यारा था जिसने प्रिया वर्मा और अब नीता को मारा था? उसे जल्दी से जल्दी इस सवाल का जवाब चाहिए था।
विक्रम की तलाश
अर्जुन ने अपनी टीम को नीता के फोन कॉल रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया एक्टिविटी चेक करने का आदेश दिया। कुछ ही घंटों में एक महत्वपूर्ण सुराग मिला – नीता ने मरने से एक दिन पहले "विक्रम सिन्हा" नाम के शख्स से कई मिस्ड कॉल्स की थीं।
सच्चाई सामने आती है
विक्रम सिन्हा का घर एक शांत सोसाइटी में था। जैसे ही अर्जुन और उसकी टीम ने दरवाज़ा खटखटाया, विक्रम ने खुद ही खोला। वह एक साधारण, शांत दिखने वाला आदमी था, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब बेचैनी थी।
कबूलनामा
थोड़ी देर की चुप्पी के बाद, विक्रम ने अपना सिर झुका लिया।
"हाँ... मैंने प्रिया को मारा था," उसने धीमी आवाज़ में कबूल किया।
अर्जुन की साँसें रुक सी गईं। आखिरकार सच सामने आ गया था।
न्याय
विक्रम को गिरफ्तार कर लिया गया। 13 साल पुराना अनसुलझा केस आखिरकार सुलझ चुका था।
अर्जुन ने खिड़की से बाहर देखा। बारिश रुक चुकी थी, और सुबह की पहली किरणें निकल रही थीं। सच्चाई भी अंधेरे से निकलकर सामने आ चुकी थी।
मोरल:
अतीत की गलतियाँ कभी दबाकर नहीं छुपाई जा सकतीं। एक न एक दिन, सच्चाई सामने आ ही जाती है।
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