अतीत की छाया - भाग 1
एक रहस्यमय हत्या का पुनरावर्तन
डिटेक्टिव अर्जुन मल्होत्रा अपने धुंधले से रोशनी वाले कार्यालय में बैठा था। छत के पंखे की धीमी आवाज़ के अलावा पूरा कमरा सन्नाटे में डूबा हुआ था। उसकी मेज़ पर बिखरे फाइल्स एक ऐसी कहानी कह रहे थे, जिसने उसकी रूह तक कंपकंपी पैदा कर दी। उसे जो केस मिला था, वह एक पुरानी, अनसुलझी हत्या के मामले से हैरतअंगेज तरीके से मिलता-जुलता था—एक ऐसा केस जिसने पुलिस विभाग को पिछले एक दशक से परेशान कर रखा था।
वह पुराना केस जो नहीं भूला था
अर्जुन ने आँखें बंद करके उस दिन की यादों को ताज़ा किया। वह तब एक नौजवान इंस्पेक्टर था, अपने करियर के शुरुआती दिनों में। प्रिया वर्मा, एक 25 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर, उसके अपार्टमेंट में मृत पाई गई थी। मौत का कारण – गला घोंटकर हत्या। लेकिन जिस चीज़ ने पुलिस और मीडिया का ध्यान खींचा था, वह थी मृतका की "पोज़िंग"।
प्रिया का शव बिस्तर पर सुलाया गया था, हाथ प्रार्थना की मुद्रा में जुड़े हुए, आँखें बंद, और चेहरे पर एक अजीब-सी शांति। जैसे वह सो रही हो, न कि मारी गई हो। उसके कमरे में कोई संघर्ष के निशान नहीं थे, कोई जबरदस्ती के आभास नहीं। दरवाज़ा अंदर से बंद था, और चाबी गायब।
एक नया मामला, पुरानी यादें
और अब, 2023 में, नीता मेहरा की लाश उसी तरह मिली थी। अर्जुन ने तस्वीरों को गौर से देखा। वही पोज़। वही शांत अभिव्यक्ति। वही बिना किसी संघर्ष के निशान वाला कमरा। बस इतना फर्क था कि इस बार मृतका की उंगलियों के बीच एक सूखा हुआ गुलाब रखा हुआ था।
"ये कोई संयोग नहीं हो सकता," अर्जुन ने मन ही मन सोचा। या तो वही हत्यारा वापस आया है... या फिर किसी ने उसकी नकल की है।
एक रहस्यमय फोन कॉल
तभी अर्जुन का फोन बज उठा। "मल्होत्रा साहब," फोन पर सब-इंस्पेक्टर राजन की हड़बड़ाई हुई आवाज़ सुनाई दी, "हमें नीता मेहरा के फ्लैट से एक वॉयस मेल मिला है... आपको इसे सुनना चाहिए।"
"मैं जानती हूँ कि वह मुझे मार देगा... अगर आप ये सुन रहे हैं, तो मैं शायद जिंदा नहीं रहूँगी। वह... वह सिर्फ़ मुझे ही नहीं, बल्कि उन सभी लड़कियों को मार रहा है जो उस रात के बारे में जानती हैं। कृपया... मेरी डायरी देखिए। वह मेरे बैग में है—"
आवाज़ अचानक कट गई। अर्जुन की साँसें तेज हो गईं। कौन सी रात? किसके बारे में बात कर रही थी नीता?
डायरी का राज
नीता के बैग से एक छोटी-सी डायरी बरामद हुई। अर्जुन ने उसे पलटना शुरू किया। अधिकांश पन्नों पर सामान्य दैनिक लेख थे, लेकिन आखिरी कुछ पृष्ठों पर एक नाम बार-बार आ रहा था – "विक्रम"।
"आज फिर विक्रम ने मुझे फोन किया। वह कह रहा था कि मुझे चुप रहना चाहिए, नहीं तो मैं प्रिया की तरह हो जाऊँगी। लेकिन मैं डरने वाली नहीं हूँ... मैं सच सामने लाऊँगी।"
अर्जुन के हाथ काँप उठे। प्रिया? क्या यह प्रिया वर्मा की बात हो रही थी?
तभी उसकी नज़र डायरी के आखिरी पन्ने पर पड़ी, जहाँ नीता ने लिखा था –
"मैंने आखिरकार वो फोटो ढूंढ ली है... जो साबित करती है कि विक्रम और प्रिया उस रात साथ थे। वह रात जब प्रिया मरी। मैं कल इसे पुलिस को दे दूँगी।"
लेकिन नीता कल जिंदा नहीं थी।
कहानी जारी रहेगी...
अगले भाग में जानिए कौन है विक्रम और क्या है उसका प्रिया वर्मा से कनेक्शन? क्या अर्जुन इस बार हत्यारे को पकड़ पाएगा?
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